इल्म से निकली किताब मैं आज पर लग गये हैं हाँ सुखे फूलों की भीनी ख़ुशबू नहीं है ज़रूर पर महसूस ही असली परबाज़ है आज शब्दों मैं पंख लगे है चलो एक बहाना ही सही इस आज को अपनाए तो जाए - स्वरूप क मोहंती
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